Saturday, 2 August 2014

क्या भारत इसराइल के साथ है?

क्या भारत इसराइल के साथ है?

ग़ज़ा में संयुक्त राष्ट्र के एक स्कूल पर इसराइली बमबारी की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और प्रेस कॉन्फ़्रेंस में रो पड़े.
उन्होंने कहा कि ग़ज़ा की त्रासदी अब एक ऐसे चरण में पहुंच गई है जहां शब्द नहीं बल्कि आंसू ही इस दर्द को बयां कर सकते हैं.

सभापति के हस्तक्षेप से सदन में बहस तो हुई लेकिन सरकार ने किसी तरह का प्रस्ताव पास करने से साफ़ इनकार कर दिया.चंद दिनों पहले जब भारतीय संसद में विपक्षी दलों ने ग़ज़ा की स्थिति पर एक प्रस्ताव मंज़ूर करने के लिए सरकार से बहस कराने की मांग की तो सरकार का कहना था कि ग़ज़ा की स्थिति पर बहस देश के हित में नहीं है क्योंकि इसके दोनों ही पक्षों से भारत के दोस्ताना रिश्ते हैं.

फ़लस्तीन से पुराने रिश्ते

सरकार का रुख़ यही था कि हमास को संघर्ष विराम के लिए तैयार होना चाहिए. पिछले दिनों विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से एक पत्रकार ने ग़ज़ा पर इसराइली हमले के बारे में भारत के पक्ष को लेकर जब सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि भारत सरकार फ़लस्तीनियों की संघर्ष का समर्थन करती है और इसराइल भारत का एक क़रीबी दोस्त है.
भारत फ़लस्तीनियों का बहुत क़रीबी दोस्त रहा है और एक फ़लस्तीनी राष्ट्र के निर्माण के उनके संघर्ष में भारत ने साथ दिया है लेकिन भारत में फ़लस्तीनियों के लिए ये समर्थन कम होता जा रहा है.
भारत अब इसराइल का एक भरोसेमंद सहयोगी है वो इसराइल से सैन्य साज-सामग्री ख़रीदने वाला सबसे बड़ा देश है.
रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में ही नहीं डेयरी, सिंचाई, ऊर्जा और बहुत से तकनीकी क्षेत्रों में इसराइल भारत के साथ साझेदारी कर रहा है.

भाजपा इसराइल के समर्थन में

पिछले कुछ सालों में इसराइल भारत के बहुत क़रीब आया है. भारत में जिस तरह फ़लस्तीनियों के लिए सहानुभूति है उसी तरह आबादी के एक बड़े हिस्से में शुरू से ही इसराइल का समर्थन भी रहा है.
भाजपा और हिंदू संगठन इसराइल के समर्थन में रहे हैं और अब भी हैं.
इसराइल, ग़ज़ा
दक्षिणपंथी विचारक और विश्लेषक फ़लस्तीनियों का समर्थन करने को मुसलमान वोट हासिल करने की सियासत के तौर पर देखते हैं.
फ़ेसबुक, ट्विटर और दूसरे सोशल मीडिया पर ऐसे लोग काफ़ी सक्रिय हैं.
भारत अगर चाहता तो वो हमास की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए ये कह सकता था कि ग़ज़ा में इसराइली बमबारी से जिस बड़े पैमाने पर आम लोग मारे गए हैं और जिस तरह शहरी इलाकों, अस्पतालों और स्कूलों को निशाना बनाया जा रहा है उसे कतई मंज़ूर नहीं किया जा सकता और इसका कोई शांतिपूर्ण हल निकलना चाहिए.
अपनी ख़ामोशी से भारत ये साफ़ संदेश देना चाहता है कि वो इस संघर्ष में अगर इसराइल के साथ नहीं है तो कम से कम इसराइल के ख़िलाफ़ भी नहीं है.

बिहार के कोसी नदी क्षेत्र में हाई अलर्ट

बिहार के कोसी नदी क्षेत्र में हाई अलर्ट

 रविवार, 3 अगस्त, 2014 को 10:14 IST तक के समाचार
सुनकोशी नदी, नेपाल
बिहार के आपदा प्रबंधन के महासचिव व्यासजी ने कहा है कि नेपाल में उपजी स्थिति के मद्देनज़र कोसी नदी के किनारे बसे आठ ज़िलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है और प्रशासन क्षेत्र से लगभग ढेढ़ लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का प्रबंध कर रहा है.
बिहार सरकार ने इस काम में सेना की मदद मांगी है. अबतक लगभग 16,000 लोगों को संभावित बाढ़ क्षेत्र से हटाया जा चुका है.

नेपाल में भारी बारिश और उसकी वजह से हुए भूस्खलन से सोनकोशी नदी की धारा अवरुद्ध होने की वजह से बिहार में कोसी नदी के जल स्तर में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी की संभावना है.
बिहार आपदा प्रबंधन विभाग ने 84 राहत शिविर तैयार करवाए हैं जिनकी संख्या बाद में ज़रूरत पड़ने पर बढ़ाई जाएगी.
पटना से स्थानीय पत्रकार मनीष शांडिल्य का कहना है कि उनकी रविवार सुबह जिन अधिकारियों से बात हुई है उनके मुताबिक़ अभी तक सोनकोशी का अवरोध हटाया नहीं जा सका है.
सुनकोशी नदी, नेपाल
काठमांडू से 120 किमी पूर्व में मौजूद सिंधुपलचौक ज़िले में जहां भूस्खलन हुआ था वहां क़रीब 100 लोगों के ग़ायब होने की आशंका है.
सुनकोशी नदी, नेपाल
नेपाल में हालात का जायजा लेने के लिए विभिन्न एजेंसियों के तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम भेजी गई है.
नेपाल में कोसी तटबंध में दरार आने की वजह से बिहार में 2008 में भयानक बाढ़ आई थी जिसमें कम से कम 26 लोगों की मौत हुई थी और क़रीब 30 लाख लोग विस्थापित हुए थे.